Thursday, 25 March 2021

यहाँ हर कोई अपना स्वार्थ चाहता है

यहाँ हर कोई अपना स्वार्थ चाहता है

 

यहाँ हर कोई अपना स्वार्थ चाहता है

यहाँ हर कोई अपना स्वार्थ चाहता है।

कोई धर्म तो कोई जातिवाद चाहता है।

मंदिर मस्जिद गुरूद्वारे के नाम पर

करना बस वह दंगा फंसाद चाहता है

इंसान अपनी इंसानियत भूलकर देखो

अपनों को ही करना बर्बाद चाहता है

नफरतो का जहर हवाओं में घोलकर

वो फिर से खुनी उग्रवाद चाहता है।

गरीबी भुखमरी भृष्टाचारी के मुद्दो पर
वो खुद को करना जिंदाबाद चाहता है

यहाँ हर कोई सिर्फ अपना स्वार्थ चाहता है

साम दाम दंड भेद से साम्राज्यवाद चाहता है

                     


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